व्याख्या कीजिए: "प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए आपतित विकिरण की आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक होनी चाहिए।"

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(N/A) देहली आवृत्ति $(\nu_0)$ धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए आवश्यक आपतित विकिरण की न्यूनतम आवृत्ति है।
प्रत्येक धातु का कार्य फलन $(\Phi = h\nu_0)$ अलग होता है, जो उसकी विशिष्ट देहली आवृत्ति को निर्धारित करता है।
यदि आपतित विकिरण की आवृत्ति $(\nu)$ देहली आवृत्ति से कम है $(\nu < \nu_0)$, तो आपतित फोटॉन की ऊर्जा धातु के कार्य फलन को पार करने के लिए अपर्याप्त होती है, और प्रकाश की तीव्रता चाहे कितनी भी हो, कोई प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं होता है।
यदि $\nu > \nu_0$ है, तो आपतित फोटॉन की ऊर्जा कार्य फलन से अधिक होती है, और प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन तात्कालिक रूप से ($10^{-9} \, s$ या उससे कम समय में) होता है, भले ही विकिरण की तीव्रता बहुत कम हो।

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मान लीजिए कि $\lambda_1$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश द्वारा उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_1$ है और $\lambda_2$ तरंगदैर्ध्य के संगत अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_2$ है। यदि $\lambda_1 = 2\lambda_2$ है,तो:

जब एक धात्विक सतह को $\lambda$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है,तो निरोधी विभव (stopping potential) $x \ V$ होता है। जब उसी सतह को $2 \lambda$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है,तो निरोधी विभव $\frac{x}{3} \ V$ होता है। धात्विक सतह के लिए देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) .......... है।

$5000 \ \mathring A$ तरंगदैर्ध्य और $4.68 \ mW/cm^2$ तीव्रता वाला प्रकाश एक प्रकाश-संवेदी सतह पर आपतित होता है। यदि आपतित फोटॉनों में से केवल $5\%$ फोटॉन फोटो-इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करते हैं,तो प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई समय में उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी?

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यदि किसी धात्विक सतह पर आपतित प्रकाश की आवृत्ति को दोगुना कर दिया जाए, तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

एक धात्विक सतह को $\lambda$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण से प्रकाशित किया जाता है,तो निरोधी विभव (stopping potential) $V_0$ है। यदि उसी सतह को $2 \lambda$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण से प्रकाशित किया जाए,तो निरोधी विभव $\frac{V_0}{4}$ हो जाता है। इस धात्विक सतह के लिए देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) होगी -

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